कुंभ में कोरोना टेस्टिंग घोटाले में केस दर्ज होने के बाद हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कृष्णराज ने जांच के लिए जिला स्तर पर SIT गठित कर दी है।
कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की कोरोना जांच करने के लिए मेले के स्वास्थ्य विभाग ने 11 लैब को अनुबंधित किया था। इनमें जांच नमूने इकट्टे करने के लिए मैक्स कॉरपोरेट सर्विस को नामित किया गया। सैंपल की जांच दिल्ली की डॉक्टर लाल चंदानी लैब और हिसार की नलवा लैब ने की। इन संस्थाओं ने फर्जी नेगेटिव रिपोर्ट तैयार करके इंट्री कर दी।
ऐसे लोगों की भी रिपोर्ट निगेटिव तैयार कर दी जो हरिद्वार कुंभ में आए ही नहीं थे। खुलासे के बाद शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी सी रविशंकर ने एक कमेटी गठित कर जांच शुरू करवा दी थी। सीएमओ डॉ. एसके झा की ओर से बृहस्पतिवार को नगर कोतवाली में इन 3 संस्थाओं के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
जांच टीम में ये भी हैं शामिल
जांच टीम में सीआईयू प्रभारी रणजीत सिंह तोमर, एएचटीयू के निरीक्षक राकेंद्र सिंह कठैत, नगर कोतवाली में तैनात एसआई लक्ष्मी मनोला, कनखल थान के एसएसआई राजेंद्र सिंह रावत, आरक्षी दीप गौड़ और शशिकांत को शामिल किया है।
SIT ने सीएमओ से की एक घंटे पूछताछ
कोविड जांच घोटाले पर गठित एसआईटी की टीम ने पहले ही दिन जांच शुरू कर दी। टीम ने शुक्रवार को CMO डॉ. एसके झा से 1 घंटे तक पूछताछ की।
कुंभ मेले के दौरान कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा कर घोटाले के आरोप नलवा लैब हिसार और डॉ. लाल चंदानी लैब सेंट्रल दिल्ली और मैक्स कॉरपोरेट सर्विस के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
SSP की ओर से शुक्रवार को गठित SIT के अधिकारी सीओ राकेश रावत, राजेश साह, राक्रेंद कठैत ने CMO को रोशनाबाद SSP कार्यालय पर बुलाकर जरूरी जानकारी ली और उनका बयान भी दर्ज किया।
हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश- दुष्यंत
बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने कहा कि विपक्षी पार्टियां हरिद्वार कुंभ पर कोविड फैलाने का आरोप लगाकर हिन्दू संस्कृति और धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि हरिद्वार में कोरोना केस बहुत कम थे और विपक्ष की नजर दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब राज्यों की ओर नहीं गई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल समाज में जहर घोलकर स्थिति को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दोरान गौतम ने कहा कि देश में वैक्सीन को कभी मोदी वैक्सीन और कभी भाजपा की वैक्सीन कहने वाले अब वैक्सीन की डोज उपलब्ध न होने का रोना रो रहे हैं। राजस्थान में 50 लाख से ज्यादा डोज जमीन या कूड़े में दबा दी गई तो पंजाब में रेमडिसिविर नदी और नालो में बहती मिली। दिल्ली में ऑक्सीजन सिलेंडर को स्टॉक किया या किराये पर दे दिए गए, जो सार्वजनिक हो गया है।
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