लखनऊ: संयुक्त किसान मोर्चा ने 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक महारैली के आयोजन की घोषणा की है. उनके साथ-साथ यूपी के सभी मंडल मुख्यालयों पर महापंचायत भी करने की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं और कार्यक्रमों का विरोध का बहिष्कार करने के योजना पर विस्तार से चर्चा की है. इस वार्ता में भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के शिवकुमार कक्का जी, जगजीत सिंह दल्लेवाल, डॉक्टर आशीष मित्तल, जय किसान आंदोलन के प्रोफेसर योगेंद्र यादव, समेत कई नेता मौजूद थे।
राकेश टिकैत: क्या चुनाव लड़ना गलत बात है
एक न्यूज चैनल की खबर के अनुसार, राकेश टिकैत ने कहा यू पी की महापंचायत में हरियाणा और पंजाब के किसान भी शामिल होंगे। और चुनाव लड़ने के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि, ‘चुनाव लड़ना कोंई गलत बात है? जो वोट देते हैं, वो खुद चुनाव भी लड़ने का फैसला कर सकते हैं।’
इस आन्दोलन को किसानों के कथित नेताओं द्वारा आत्मसम्मान और एकता का प्रतीक बना बनाने का प्यास हो रहा है. BKU के राकेश टिकैत ने कहा कि, “नये कानूनों को रद्द तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग का ये ऐतिहासिक किसान आंदोलन 8 महीने पूरे कर चुका है। अब ये देश बचाने का आंदोलन भी बन चुका है।” अब आंदोलन को और तेज, और असरदार बनाने के लिए किसान मोर्चा इसे मिशन उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से रूप में शुरू करने का फैसला कर चूका है।
उन्होंने बताया कि इस मिशन में पूरे उत्तर प्रदेश में यात्राओं, बैठकों, और रैलियों का सिलसिला शुरू होगा। किसान मोर्चा ने 4 चरणों में आंदोलन को बाटा है पहले चरण में राज्यों में आंदोलन के संगठनों के साथ संपर्क स्थापित किया जाएगा और दूसरे चरण मे मंडलवार व जिलेवार तैयारी के लिए बैठक होगी। तीसरे चरण में मुजफ्फरनगर में एक बड़ी पंचायत की जाएगी और चौथे यानि लास्ट चरण में सभी जिला मुख्यालयों पर पंचायत का आयोजन होगा।
अब आंदोलन को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में और तेज करने की प्लानिंग होगी और अब इस मिशन का स्थानीय मुद्दे भी उठने वाली है. इसमे उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सभी टोल प्लाजा को निशुल्क करने का भी है, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का विरोध प्रदर्शन भी सम्मलित है.
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